2012 के मुकाबले मोदी कार्यकाल में 33% बढ़ी बलात्कार की घटनायें : NCRB रिपोर्ट

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कांग्रेस कार्यकाल में जब देश के किसी भी हिस्से में रेप की घटनाये सामने आती थी तब बीजेपी उस समय कांग्रेस पर काफी हमलावर बन जाती। लेकिन अब वैसा लगता नहीं की रेप के प्रति बीजेपी गंभीर दिखयी पड़ती है. ऐसा कहना है निर्भया की माँ आशा देवी का. उन्होंने इशारे में ही यह बात कल मीडिया से बातचीत करते हुए कहा.

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2012 में केंद्र समेत दिल्ली प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी उस समय दिल्ली के एक लड़की निर्भया से गैंगरेप की घटना सामने आयी थी. उस लड़की की कुछ दिनों बाद मौत भी हो गया था. इसको लेकर देश में काफी प्रदर्शन हुआ. हंगामा हुआ. देश की सरकार की देश समेत अन्तर नेशनल स्तर पर जमकर आलोचना की गयी.

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उस समय नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र के नांदेड़ में एक जनसभा को सम्बोधित करते हुए कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा था. नरेंद्र मोदी ने उस समय अपने चुनावी भाषण में कहा था की, ” ‘दिल्ली में निर्भया की घटना घटी एक निर्दोष बच्ची पर बलात्कार हुआ. उसे मौत के घाट उतार दिया गया. आज भी मैं सुबह-सुबह समाचार देख रहा था. आज भी दिल्ली में एक बलात्कार की घटना घटी. दिल्ली को मानो बलात्कारियों की राजधानी बना दिया गया हो. ये स्थिति पैदा की गई।’

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उसी साल चुनाव से ठीक पहले एक और रैली में नरेंद्र मोदी ने कहा था- ‘दिल्ली को जिस प्रकार से रेप कैपिटल बना दिया है. उसके कारण पूरी दुनिया में हिंदुस्तान की बेइज्जती हो रही है.और आपके पास मां-बहनों की सुरक्षा के लिए न कोई योजना है..न आपमें कोई दम है..न आप इसके लिए कुछ कर सकते हैं.

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अब आज केंद्र में मोदी की दोबारा सरकार बन गयी है. वही दूसरी और निर्भया का भी आखिरी पायदान पर आ पहुंची है. निर्भया केश के दोषियों को एक फरवरी को उन चारो दोषियों को सुबह फांसी देनी है तो देश की राजनीती भी काफी गर्म हो गयी है. ऊपर से देश में अगले महीने चुनाव है. तो आज हम यही देखने की कोसिस कर रहे है की 2012 के मुकावले अब तक कितनी रेप की घटनाये हुई है और कितनी बढ़ी है

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आज इस बात पर गौर करे तो 2012 में देश में दुष्कर्म के 24 हजार 923 मामले दर्ज किए गए थे। यानी रोजाना 68 मामले। 2018 में देश में ऐसे 33 हजार 356 केस दर्ज किए गए। यानी रोजाना करीब 90 मामले। अकेले दिल्ली में निर्भया के बाद दुष्कर्म के मामलों में 176% का इजाफा हुआ है। 2012 में दिल्ली में ऐसे 706 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि 2019 की 15 नवंबर तक ही 1 हजार 947 मामले दर्ज हो चुके हैं। आपको बता दे ये आंकड़े इसी सरकार की संस्था एनसीआरबी (नेशलन क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो) के हैं।

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एनसीआरबी के मुताबिक, 2018 के अंत तक देश की अदालतों में दुष्कर्म के 1 लाख 38 हजार 342 मामले पेंडिंग थे। इनमें से 17 हजार 313 मामलों का ही ट्रायल पूरा हो सका, जबकि सिर्फ 4 हजार 708 मामलों में ही सजा सुनाई गई। 2018 में सजा देने की दर यानी कन्विक्शन रेट सिर्फ 27.2% रहा जो 2017 की तुलना में 5% कम है। 2017 में कन्विक्शन रेट 32.2% था।

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